साध्वी हर्षानंद बोलीं- सेवादारों पर भरोसा नहीं तो कौन देगा सुरक्षा, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा- महिलाएं अकेले न आएं
रवीन्द्र त्रिपाठी
नई दिल्ली। धार्मिक आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद के बयान ने बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ कहा कि आश्रमों में महिलाओं का अकेले जाना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उनका सवाल है कि यदि आश्रम में तैनात सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन उठाएगा? इसी मुद्दे पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने भी महिलाओं को अकेले आश्रम आने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं आश्रम या धार्मिक स्थलों पर अकेले न आएं, बल्कि परिवार अथवा परिचित लोगों के साथ आएं। इन बयानों के बाद धार्मिक स्थलों और आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। साध्वी हर्षानंद का कहना है कि किसी भी आश्रम में आने वाली महिला श्रद्धालु यह मानकर आती है कि वहां उसका सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। ऐसे में वहां काम करने वाले सेवादारों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि उन्हीं पर विश्वास का संकट पैदा हो जाए तो आश्रम प्रबंधन की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। धीरेंद्र शास्त्री की ओर से महिलाओं को अकेले नहीं आने की सलाह को सुरक्षा के एहतियाती उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इससे एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—क्या धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी महिलाओं को अपने साथ किसी पुरुष या परिवारजन को लाने की सलाह देकर पूरी हो सकती है, या फिर संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही मजबूत करनी चाहिए? आश्रमों में बड़ी संख्या में महिलाएं श्रद्धा, साधना, धार्मिक कार्यक्रमों और सेवा के लिए पहुंचती हैं। ऐसे में महिला श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना आश्रम प्रबंधन की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। महिला सुरक्षा के लिए पर्याप्त महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, शिकायत तंत्र और कर्मचारियों के सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं भी चर्चा के केंद्र में हैं। इन बयानों ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिला सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही का सवाल भी सामने ला दिया है। अब बहस इस बात पर है कि महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह देने के साथ-साथ आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था को कितना जवाबदेह बनाया जाए।
