Advertisement
f ▶ ◎ 𝕏

ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए राज्यों में एक्शन शुरू, केरल में प्रस्ताव पास

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केरल में उन्हें पद से हटाने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव पारित किए जाने की खबर है। वहीं, विपक्षी INDIA गठबंधन भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहा है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही और सुधार की मांग की जा रही है। केरल विधानसभा में पारित प्रस्ताव में SIR प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं को दूर करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने पर जोर दिया गया है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

केरल में उठी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग

केरल में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग से जुड़े प्रस्ताव को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को दूर करना जरूरी है।केरल विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने से चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत ही पूरी होती है।

विपक्ष ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

विपक्ष की ओर से मतदाता सूची, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित तीन प्रमुख मांगें उठाई गई हैं।

1. पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं

विपक्ष की मांग है कि SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच की जाए। जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा शामिल करने और उनके मतदान के अधिकार की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

2. मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जा सकता है।

3. चुनाव आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में बदलाव हो

विपक्ष चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में बदलाव की मांग भी कर रहा है। उसकी मांग है कि समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल किया जाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सके।

मतदान के अधिकार को लेकर विपक्ष का जोर

केरल में इस मुद्दे पर दिए गए बयान में मतदान के अधिकार को लोकतंत्र का बुनियादी आधार बताया गया है। विपक्ष का कहना है कि पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए और मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।