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राज्यसभा चुनाव को लेकर यूपी में सियासी सरगर्मी तेज

भाजपा ने खरीदा नौवां पर्चा, सेंधमारी और क्रॉस वोटिंग की अटकलें बढ़ीं

रवीन्द्र त्रिपाठी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा के आठ उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बीच पार्टी द्वारा नौवां नामांकन पत्र खरीदे जाने से मुकाबले के समीकरण अचानक दिलचस्प हो गए हैं। संख्या बल के आधार पर आठ सीटों पर भाजपा और दो सीटों पर सपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन नौवें पर्चे ने सेंधमारी, अतिरिक्त वोटों के इस्तेमाल और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
सपा की ओर से वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी नामांकन दाखिल कर चुके हैं। पार्टी के पास दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त प्रथम वरीयता वोट माने जा रहे हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की स्थिति में 10वीं सीट के लिए मुकाबला खुल जाएगा और चुनाव निर्विरोध होने की संभावना समाप्त हो जाएगी।

नौवें पर्चे ने बढ़ाई बेचैनी

भाजपा ने पहले आठ नामांकन पत्र खरीदे थे, लेकिन नौवां पर्चा खरीदने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी आठ सीटों से आगे की रणनीति पर काम कर रही है। मौजूदा संख्या बल के गणित में आठवीं सीट के लिए भी सहयोगी दलों और संभावित अतिरिक्त समर्थन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों में भाजपा के पास सपा के कुछ विधायकों के संभावित समर्थन के दावे भी सामने आए हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि मतदान से पहले संभव नहीं है।
राज्यसभा चुनाव में एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता बताई जा रही है। यही वजह है कि अंतिम दौर में एक-एक विधायक का रुख दोनों खेमों के लिए अहम हो सकता है।

सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है तो बदल जाएगा खेल

सपा के सामने अब सबसे बड़ा सवाल तीसरे उम्मीदवार को लेकर है। पार्टी के पास अपने दो प्रत्याशियों को जिताने के बाद भी कुछ अतिरिक्त वोट हैं। लेकिन तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में उसे भाजपा-एनडीए के असंतुष्ट विधायकों या अन्य छोटे दलों/निर्दलीय विधायकों से समर्थन हासिल करने की कोशिश करनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, भाजपा के नौवें पर्चे को इसी संभावित मुकाबले की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा ने अभी तक नौवें पर्चे के आधार पर किसी अतिरिक्त प्रत्याशी को मैदान में उतारने की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी; पार्टी ने अब आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं।

दोनों खेमों के सामने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती

राज्यसभा चुनाव का यह गणित सिर्फ संख्या का खेल नहीं रह गया है। प्रथम वरीयता वोट, अतिरिक्त वोट और संभावित क्रॉस वोटिंग अब दोनों दलों की रणनीति के केंद्र में हैं। पिछले राज्यसभा चुनावों में भी उत्तर प्रदेश में क्रॉस वोटिंग और विधायकों के पाला बदलने के मामले सामने आते रहे हैं, इसलिए इस बार भी मतदान तक राजनीतिक निगाहें हर विधायक की गतिविधि पर टिकी रहेंगी। ऐसे में राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा—दोनों के लिए संगठनात्मक एकजुटता और संख्या बल की परीक्षा बन गया है। फिलहाल असली सवाल यह है कि नौवां पर्चा सिर्फ रणनीतिक दबाव बनाने का हथियार है या 10वीं सीट के लिए वास्तविक चुनावी चुनौती की तैयारी—इसका जवाब नामांकन की अंतिम तस्वीर और मतदान के दिन ही साफ होगा।