चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था में दोनों गुटों को दिए अलग नाम और चुनाव चिन्ह; 6 अक्टूबर के उपचुनाव में नई पहचान से उतरेंगे उम्मीदवार
रवीन्द्र त्रिपाठी
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर दो राजनीतिक पहचान में बदल गया है। चुनाव आयोग ने मूल आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। आयोग के फैसले के मुताबिक ममता बनर्जी गुट अब ‘ममता आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम से चुनाव लड़ेगा और उसे ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, जिसमें अरूप रॉय भी प्रमुख भूमिका में हैं, को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
नामांकन बचाने के लिए अंतरिम व्यवस्था
चुनाव आयोग का यह फैसला तत्काल प्रभाव से दोनों गुटों के उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया में स्पष्ट पहचान देने के उद्देश्य से है। आयोग के अनुसार अंतिम रूप से यह तय होना बाकी है कि मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार किस गुट का होगा। तब तक दोनों पक्ष नई पहचान के साथ चुनाव लड़ेंगे।
6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इसी दिन असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव होगा। नगांव लोकसभा उपचुनाव और पश्चिम बंगाल की दोनों विधानसभा सीटों का चुनाव एक ही तारीख को है, लेकिन ये अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र हैं।
28 साल पुराना नाम-चिन्ह विवाद के केंद्र में
‘जोड़ा फूल’ टीएमसी की पारंपरिक चुनावी पहचान रही है। अब दोनों गुटों को उससे अलग प्रतीक मिलने के बाद आगामी उपचुनाव पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होंगे। आयोग ने फिलहाल मूल नाम और चिन्ह को फ्रीज रखा है और दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय बाद में किया जाएगा।
फुटबॉल बनाम लिफाफा—अब उपचुनाव में टीएमसी की सियासी लड़ाई सिर्फ उम्मीदवारों की नहीं, बल्कि पार्टी की पहचान पर भी होगी।
