रवीन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की कवायद तेज कर दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ऐलान के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। आज से शुरू होने वाले अभियान में सपा कार्यकर्ता बूथ स्तर पर घर-घर पहुंचकर जनता से सीधा संवाद करेंगे।
अभियान के दौरान कार्यकर्ता सपा सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता के बीच रखने के साथ मौजूदा भाजपा सरकार की कथित नाकामियों को भी मुद्दा बनाएंगे। खास तौर पर भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की गई है।
बूथ बनेगा सियासी लड़ाई का केंद्र
सपा की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना है। पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने और स्थानीय समस्याओं को समझने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि सपा अब चुनावी तैयारियों को लखनऊ और जिला मुख्यालयों से निकालकर सीधे गांव, मोहल्ले और बूथ तक ले जाना चाहती है।
भ्रष्टाचार और एसएआर मुद्दे पर फोकस
सपा कार्यकर्ता जनता के बीच भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही एसएआर मुद्दे को लेकर भी लोगों को जागरूक करने की रणनीति बनाई गई है। पार्टी इसे चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
2027 के लिए अभी से चुनावी मोड में सपा
2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन सपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बूथ कमेटियों की सक्रियता, कार्यकर्ताओं का जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों को चुनावी मुद्दे में बदलने की रणनीति से साफ है कि पार्टी ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो सपा का यह अभियान केवल जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के लिए मतदाताओं की नब्ज टटोलने और संगठन को चुनावी मशीनरी में बदलने की शुरुआती कवायद भी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि अखिलेश यादव की बूथ-केंद्रित रणनीति भाजपा के मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क को कितनी चुनौती दे पाती है।
