भारतीय सेना की ताकत और बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के T-72 ‘अजेय’ और T-90 ‘भीष्म’ टैंकों के लिए स्वदेशी ऑक्सिलियरी पावर यूनिट (APU) खरीदने का 586 करोड़ रुपये की डील की है। ये दोनों टैंक सोवियत डिजाइन के हैं। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए स्वदेशी कंपनी एक्युरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया गया। आखिर ये दोनों टैंक की क्या खासियत हैं और ये भारतीय सेना के लिए क्यों जरूरी हैं? आइए बताते हैं।
T-72 ‘अजेय’ क्या है?
T-72 का सबसे पुराना और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मुख्य युद्धक टैंक (Main Battle Tank) है। इसे सोवियत संघ ने डेवलेप किया था और भारत ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाया। यह टैंक दशकों से भारतीय सेना की रीढ़ बना हुआ है। यह 125 मिमी की मुख्य तोप से लैस है। इसे रेगिस्तान से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक तैनात किया जा सकता है। भारत में अपग्रेड कर इसे T-72M1 ‘अजेय’ बनाया गया।
T-90 ‘भीष्म’ क्या है?
T-90 भारतीय सेना का एडवांस और ज्यादा घातक टैंक है। इसे रूस से खरीदा गया था और अब इसका निर्माण भारत में भी किया जाता है। यह भारतीय सेना का फ्रंटलाइन बैटल टैंक है, जिसमें 125 मिमी की एडवांस गन का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने की क्षमता है। यह टैंक अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस है। यह टैंक रात में सटीक निशाना लगाने की क्षमता रखता है। इसे लद्दाख की ऊंचाइयों और राजस्थान के रेगिस्तान दोनों में तैनात किया जा सकता है।
आखिर क्या होता है APU?
ऑक्सिलियरी पावर यूनिट (APU) एक छोटा पावर सिस्टम होता है, जो टैंक का मुख्य इंजन बंद होने पर भी बिजली उपलब्ध कराता है। इसकी मदद से टैंक के फायर कंट्रोल सिस्टम, गन स्टेबलाइजेशन सिस्टम, थर्मल इमेजर, कम्युनिकेशन सिस्टम और निगरानी उपकरण बिना मुख्य इंजन चलाए काम करते रहते हैं।
दुश्मन के लिए टैंक को ढूंढना होगा मुश्किल
पहले टैंक के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम चलाने के लिए मुख्य इंजन चालू रखना पड़ता था। इससे आवाज और गर्मी निकलती थी, जिसे दुश्मन के ड्रोन और सेंसर पकड़ सकते थे। अब APU की मदद से इंजन बंद रहेगा, लेकिन सिस्टम चालू रहेंगे। इससे टैंक ‘साइलेंट वॉच’ मोड में काम करेगा और दुश्मन के लिए उसे पहचानना मुश्किल होगा।
लद्दाख और ऊंचाई वाले इलाकों में बड़ा फायदा
लद्दाख जैसे इलाकों में बेहद कम तापमान के कारण इंजन को बार-बार स्टार्ट करना चुनौतीपूर्ण होता है। APU बैटरी और जरूरी सिस्टम को चालू रखेगा, जिससे टैंक हर समय ऑपरेशन के लिए तैयार रहेगा। इससे चीन सीमा पर सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता मजबूत होगी।
ईंधन की बड़ी बचत
मुख्य इंजन बहुत ज्यादा ईंधन खर्च करता है। लंबे समय तक निगरानी या तैनाती के दौरान APU कम ईंधन में बिजली उपलब्ध कराएगा। इससे ईंधन की खपत घटेगी, लॉजिस्टिक दबाव कम होगा और टैंक लंबे समय तक युद्धक्षेत्र में टिक सकेंगे। अगर किसी कारण से मुख्य इंजन बंद हो जाए या क्षतिग्रस्त हो जाए, तब भी APU फायर कंट्रोल और हथियार प्रणालियों को बिजली देता रहेगा।
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, स्वदेशी कंपनी को दिया गया यह ऑर्डर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन के अनुरूप टैंकों के लिए एपीयू निर्माण तकनीक में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस परियोजना में भविष्य में घरेलू और निर्यात बाजार में बड़े कारोबारी अवसर पैदा करने की क्षमता भी है। भारतीय सशस्त्र बलों के पास मौजूद टी-72, टी-90, अर्जुन टैंक और बीएमपी वाहनों के बड़े बेड़े के कारण एपीयू की लगातार जरूरत बनी रहेगी। आने वाले वर्षों में नए टैंकों की आपूर्ति के साथ इसकी मांग और बढ़ने की संभावना है।
मंत्रालय के अनुसार, रूस निर्मित टी-72 और टी-90 टैंकों का इस्तेमाल करने वाले कई देशों में भी भारत में बने एपीयू के निर्यात की संभावना है। पूर्व सोवियत देशों के अलावा ईरान, इराक और मिस्र जैसे देशों की सेनाओं में भी ये मुख्य युद्धक टैंक शामिल हैं।
