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‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी का निशाना, बोले- सवाल करने वालों से सिस्टम को डर

 इंदौर। राहुल गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम के लिए IDA ग्राउंड पर 20 से 25 हजार युवा पहुंचे थे। राहुल गांधी ने इस कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

इंदौर के छात्रों की गूंज

राहुल गांधी ने कहा स्टूडेंट को सिस्टम कैसे बनाना, कैसे सिस्टम को चैलेंज करेंगे इंदौर के छात्रों के गूंज का मुद्दा है। छात्र में जिज्ञासा होती है, सवाल पूछते हैं, छात्र नफरत नहीं करते प्यार से बर्ताव करते है। छात्र निडर, दूसरी सोच को समझने की कोशिश करते हैं डराते नहीं है। ईमानदारी से देश बनता हैं और ये क्वालिटी भारत के हर युवा में है इन्ही क्वालिटीज को सुरक्षित रखना है।

राहुल गांधी बोले- आज का टॉपिक ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’

राहुल गांधी ने कहा, “आपने मेरा जिस तरह स्वागत किया, उसके लिए धन्यवाद। मैं यहां आकर बहुत खुश हूं।” उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कोटा, देहरादून और पुणे के बाद अब इंदौर में आयोजित किया जा रहा है। राहुल ने कहा कि हर शहर में कार्यक्रम के दौरान छात्रों से जुड़े मुद्दे और उनके भविष्य से जुड़े सवाल उठाए जाते हैं। इनमें पेपर लीक, संस्थागत विफलता, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षा की बढ़ती लागत और निजीकरण जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा, “इंदौर में हमने तय किया है कि आज का विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ होगा। छात्र बताएंगे कि सिस्टम क्या है, वह छात्रों को कैसे प्रभावित कर रहा है और किस तरह छात्रों के भविष्य के सामने चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कार्यक्रम में कई युवा मंच पर आकर अपने दिल की बात रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की शुरुआत की।

आज स्टूडेंट खुश नहीं- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि अगर आज हम स्टूडेंट्स से बात करें तो वे खुश नहीं हैं। स्टूडेंट्स असहज हैं, उन्हें अपना भविष्य नहीं दिख रहा और वे दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि आइए, स्टूडेंट्स की आवाज सुनते हैं। आप सिस्टम के बारे में क्या कह रहे हैं, उसे सुनते हैं। छात्रों के मन में यह सवाल है कि परीक्षा पर भरोसा कैसे किया जाए? कैसे भरोसा करें कि परीक्षा पूरी पारदर्शिता के साथ हो रही है? कैसे पता चले कि किसी परीक्षा में सही तरीके से चयन हुआ है या नहीं?

राहुल बोले- कैंडिडेट्स की भी गलती, युवा बोले- हम सिस्टम से हार गए

राहुल गांधी ने कहा- परीक्षाओं के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की भी गलती हुई है, लेकिन कहीं न कहीं उनका सिस्टम पर भरोसा खत्म हो गया है। इसके बाद छात्रों की ओर से आवाज आई- “सर, हम सिस्टम से हार गए।” राहुल ने कहा कि सिस्टम के अंदर बैठे कुछ लोग भ्रष्ट हो जाते हैं। पैसे के चक्कर में पेपर लीक कर देते हैं और लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्ट लोग परीक्षा व्यवस्था में रहेंगे और परीक्षा प्रणाली ही भ्रष्ट होगी, तो इसका नुकसान बच्चों को उठाना पड़ेगा।

छात्र बोले- हर तरफ फर्जीवाड़ा हो रहा है

एमपी पीएससी में 13 प्रतिशत पर कोर्ट का हवाला देकर रिजल्ट होल्ड कर रही सरकार, कई भर्ती नहीं हो रही निजीकरण हो रहा। राजगढ़ की सपना गुर्जर बोली कांग्रेस ने 14 से 24 प्रतिशत आरक्षण किया भाजपा ने रोक लगाई। एक लाख 87 हजार युवा इंतजार कर रहे।

राहुल बोले- सिस्टम की टॉप लेयर पर 6 लोग

राहुल ने स्क्रीन पर स्लाइड दिखाई। इसके बाद बोले- तीन फ्रेंड ने सिस्टम की बात की। सिस्टम क्या है, सिस्टम में कई लेयर हैं, टॉप लेवल पर 6 लोग बैठे हैं। इसे मोदी चलाते हैं। धमकाने का काम, उन्हें मारने का काम, पैलेट गन मारने का काम शाह करते हैं। उस तरफ शायद आपको उनको पहचानों या न पहचानों अजित डोभाल कहते हैं कि देश को कंट्रोल करना है तो 500 लोगों को कंट्राोल करने की जरूरत है। ये देश के कम्यूनिकेशन पर कब्जा किए हैं। ये फोन टैपिंग कराते हैं, ये मोदी-शाह को सूचना देते हैं। आपके फोन के अंदर डोभाल बैठे हैं।बीच में भागवत जी है जो विचारधारा की बात करते हैं जिनके संगठन को हजारों करोड़ मिलते हैं। वहीं दूसरी तरफ अंबानी और अडाणी है। ये लोग फाइनेंस करते हैं। पैसा घुमाकर भाजपा को दिया जाता है। इस लेयर के नीचे हर संस्था को कैप्चार करके रखा है। इसमें मीडिया, एंटरनटेनमेंट, न्याय सभी में एक-एक आदमी बिठा रखा है। जैसे देश में कई क्रिकेटर्स है लेकिन सिस्टम ने शाह के बेटे को क्रिकेट का ठेका दे दिया है। यहां डेमोक्रेसी की बात होती है लेकिन सिस्टम अपने आदमी को बिठा देता है।

स्टूडेंट को सिस्टम से खतरा- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि अब इंटरेस्टिंग बात बताता हूं। सिस्टम को स्टूडेंट से खतरा है। क्यों खतरा है, क्योंकि स्टूडेंट सवाल पूछता है। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट सवाल करता है कि अमित शाह जी के बेटे क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बन गए? स्टूडेंट पूछता है कि हिंदुस्तान के पूरे बिजनेस को दो लोगों ने कैसे कैप्चर कर लिया? स्टूडेंट यह भी पूछता है कि ज्युडिशियरी और बाकी संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं करतीं और इलेक्शन कमीशन अपना काम क्यों नहीं करता? इसीलिए सिस्टम स्टूडेंट नहीं चाहता, सिस्टम अंधभक्त चाहता है। उन्होंने कहा कि अंधभक्त कौन है? अंधभक्त एंटी-स्टूडेंट है। जहां स्टूडेंट सवाल पूछता है, जहां स्टूडेंट क्यूरियस है, वहां अंधभक्त डेलूजनल है, अपनी दुनिया में रहता है। राहुल ने कहा कि जहां स्टूडेंट मोहब्बत की बात करता है और प्यार व सम्मान से बात करता है, वहां अंधभक्त नफरत फैलाता है। जहां स्टूडेंट हम्बल होता है, दूसरों की बात सुनता है, वहां अंधभक्त अहंकार से भरा और एरोगेंट होता है। उन्होंने कहा कि जहां स्टूडेंट डरता नहीं है और निडर होता है, वहां अंधभक्त डरपोक होता है। राहुल के मुताबिक, जहां स्टूडेंट महिलाओं का सम्मान करता है, वहां अंधभक्त पेट्रियार्कल होता है और महिलाओं पर हमला व उनका अपमान करता है। राहुल गांधी ने कहा कि जहां स्टूडेंट ईमानदार होता है, वहां अंधभक्त डिसऑनेस्ट और झूठा होता है।

‘सिस्टम चलाने वालों के बच्चे विदेश में पढ़ रहे’

राहुल गांधी ने कहा कि सिस्टम को चलाने वाले बच्चों को देखिए वे इंदौर में पढ़ रहे हें या विदेश में। ये देश के युवाओ को अंधभक्त बनाना चाहते हें। अपने बच्चों को बाहर भेजेंगे पढ़ने के लिए। हमने शुरुआत में कहा कि स्टूडेंट देश को बनाता है, शिक्षा देश की नींव है, यह हर स्टूडेंट का हक है। स्कूल मिडडे मील से लेकर कॉलेज और कॉलेज से रोजगार तक पहुंचाना, ये सरकार का काम है।

‘सिस्टम नहीं चाहता कि कोई सवाल पूछे’

राहुल स्टूडेंट्स से बात करते हुए स्टूडेंट और अंधभक्त के बीच 4 अंतर गिनाए। उन्होंने कहा कि जहां स्टूडेंट सवाल पूछता है वहां अंधभक्त डेल्यूजनल है, जहां स्टूडेंट मोहब्बत की बात करता है अंधभक्त नफरत फैलाता है, जहां स्टूडेंट निडर होता हे वहां अंधभक्त डरपोक होता है। जहां स्टूडेंट महिलाओं की इज्जत करता हे अंधभक्त महिलाओं का अपमान करता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि सिस्टम नहीं चाहता कि स्टूडेंट सवाल पूछे इसलिए सिस्टम अंधभक्तत को तैयार करता है, उन्हें प्रमोट करता है।

‘शिक्षा लग्जरी नहीं, हर स्टूडेंट का हक’

राहुल ने कहा कि स्टूडेंट देश का फाउंडेशन होता है। स्टूडेंट देश को बनाता है। शिक्षा कोई लग्जरी नहीं है, हर स्टूडेंट का हक है। किंडर से मिड डे मील, स्कूल, कॉलेज और रोजगार, ये आपका काम नहीं है। ये हिंदुस्तान की सरकार का काम है। सरकार को सिस्टम चलाना चाहिए, मगर देश में उलटा हो रहा है।